मास्टर्स एथलेटिक्स: स्वस्थ, सकारात्मक, और सम्मानजनक पृौढ अबस्था
मास्टर्स एथलेटिक्स : स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानपूर्ण वृद्धावस्था का सशक्त अभियान
— बलवन्त सिंह बिष्ट1
सदस्य, देवभूमि मास्टर्स एथलेटिक्स एसोसिएशन2, उत्तराखण्ड
"उम्र शरीर की हो सकती है, लेकिन उत्साह, साwहस और संकल्प की नहीं।"
हमारे समाज में अक्सर यह माना जाता है कि 60 या 70 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति को केवल आराम करना चाहिए। परन्तु आज विश्वभर में लाखों वरिष्ठ नागरिक इस धारणा को बदल रहे हैं। वे दौड़ रहे हैं, ऊँची कूद लगा रहे हैं, गोला और भाला फेंक रहे हैं तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस प्रेरणादायक अभियान का नाम है—मास्टर्स एथलेटिक्स।
मास्टर्स एथलेटिक्स क्या है?
मास्टर्स एथलेटिक्स 35 वर्ष या उससे अधिक आयु के खिलाड़ियों के लिए आयोजित खेल प्रतियोगिताओं का अंतरराष्ट्रीय आंदोलन है। इसमें खिलाड़ियों को पाँच-पाँच वर्ष के आयु वर्गों—35+, 40+, 45+, 50+, 55+, 60+, 65+, 70+, 75+, 80+, 85+, 90+, 95+ और 100+—में विभाजित किया जाता है। इससे समान आयु वर्ग के खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा होती है।
इन प्रतियोगिताओं में दौड़, रेस वॉक, ऊँची कूद, लंबी कूद, ट्रिपल जंप, गोला फेंक, चक्का फेंक, भाला फेंक, हैमर थ्रो तथा रिले जैसी अनेक स्पर्धाएँ होती हैं।
विश्व से भारत तक
विश्व स्तर पर World Masters Athletics (WMA) तथा Asia Masters Athletics (AMA) इस आंदोलन का संचालन करते हैं। भारत में Masters Athletics Federation of India (MAFI) इसकी राष्ट्रीय संस्था है। इसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य में संबद्ध संगठन कार्य करते हैं।
उत्तराखण्ड में देवभूमि मास्टर्स एथलेटिक्स एसोसिएशन, देहरादून राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है। राज्य प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर सफल खिलाड़ी एशियाई तथा विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त करते हैं। सामान्यतः प्रत्येक खिलाड़ी अधिकतम तीन स्पर्धाओं में भाग लेता है।
केवल खेल नहीं, जीवन जीने की कला
मास्टर्स एथलेटिक्स का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य है—स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और सक्रिय जीवन।
नियमित अभ्यास से हृदय स्वस्थ रहता है, मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, हड्डियों की क्षमता बढ़ती है तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी बीमारियों का जोखिम कम होता है। मानसिक रूप से भी व्यक्ति अधिक आत्मविश्वासी, सकारात्मक और उत्साही बनता है।
सेवानिवृत्ति के बाद अनेक लोगों को लगता है कि अब जीवन में करने के लिए बहुत कम बचा है। मास्टर्स एथलेटिक्स इस सोच को बदल देता है। यह जीवन को नई दिशा, नया उद्देश्य और नई पहचान देता है।
मेरा अनुभव
मैं 73 वर्ष की आयु में देवभूमि मास्टर्स एथलेटिक्स एसोसिएशन, उत्तराखण्ड का सदस्य हूँ। जब मैंने इस आंदोलन से जुड़ना प्रारम्भ किया, तब अनुभव हुआ कि खेल केवल युवाओं के लिए नहीं हैं। नियमित अभ्यास ने मुझे शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय, मानसिक रूप से अधिक प्रसन्न तथा सामाजिक रूप से अधिक जुड़ा हुआ बनाया।
प्रतियोगिताओं में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ खिलाड़ियों से मिलना, उनके संघर्ष और उपलब्धियाँ सुनना तथा उनसे मित्रता करना जीवन का अमूल्य अनुभव है। वहाँ यह अनुभव होता है कि हम सब एक परिवार हैं, जिसका उद्देश्य स्वस्थ, अनुशासित और प्रेरणादायक जीवन जीना है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक संदेश
आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे वरिष्ठ नागरिक घर की चारदीवारी तक सीमित न रहें। प्रतिदिन प्रातः भ्रमण करें, हल्का व्यायाम करें, योग करें और यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो मास्टर्स एथलेटिक्स से जुड़ें। शुरुआत छोटे कदमों से भी की जा सकती है।
जीतना आवश्यक नहीं है; भाग लेना, स्वस्थ रहना और आत्मविश्वास बनाए रखना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हर अभ्यास, हर कदम और हर प्रतियोगिता स्वयं पर विजय पाने का अवसर है।
DAY CARE जैसी संस्थाओं की भूमिका
DAY CARE, अल्मोड़ा जैसी वरिष्ठ नागरिक संस्थाएँ समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि वे स्वास्थ्य जागरूकता शिविर, नियमित व्यायाम, योग, पैदल चलने के अभियान तथा मास्टर्स एथलेटिक्स के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, तो अनेक वरिष्ठ नागरिक इससे लाभान्वित होंगे।
यह केवल स्वास्थ्य का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता का भी अभियान बनेगा।
निष्कर्ष
वृद्धावस्था जीवन का अन्तिम पड़ाव नहीं, बल्कि अनुभव, धैर्य और परिपक्वता का स्वर्णिम काल है। यदि इस काल में स्वास्थ्य, अनुशासन और सक्रियता जुड़ जाए, तो जीवन और भी सार्थक बन जाता है।
मास्टर्स एथलेटिक्स हमें सिखाता है कि उम्र कभी भी सपनों की सीमा नहीं बन सकती। आवश्यकता केवल एक निर्णय की है—स्वस्थ रहने का, सक्रिय रहने का और जीवन को पूरे उत्साह के साथ जीने का।
आइए, हम सब मिलकर यह संदेश समाज तक पहुँचाएँ—
"उम्र नहीं, उत्साह मायने रखता है।
रुकना नहीं, चलते रहना ही जीवन है।
स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें और दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।"

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